SECL जोहिला क्षेत्र में क्वार्टर रिपेयरिंग में भारी अनियमित होने की संभावना (भ्रष्टाचार, घटिया सामग्री, या तकनीकी खामियों) की प्रबल आशंका
केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) जांच की मांग
RTI का दमन, ठेके में गड़बड़ी और सूचना छुपाने का गंभीर आरोप
संदीप तिवारी | विशेष रिपोर्ट उमरिया (मध्यप्रदेश)- साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के जोहिला क्षेत्र अंतर्गत नौरोजाबाद उपक्षेत्र में सरकारी क्वार्टरों की रिपेयरिंग एवं एएमसी (AMC) कार्यों को लेकर गंभीर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की आशंका सामने आई है। मामला तब और गंभीर हो गया जब सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत मांगी गई जानकारी को न केवल रोका गया, बल्कि जानबूझकर भ्रामक और अप्रासंगिक दस्तावेज भेजकर आवेदक को गुमराह करने का प्रयास किया गया।
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RTI के जरिए उठा मामला
सूचना अधिकार द्वारा दिनांक 12 जनवरी 2024 को दायर RTI आवेदन में ठेकेदार अवध शर्मा के नाम से कराए गए क्वार्टर रिपेयरिंग एवं एएमसी कार्यों से संबंधित निम्न बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई थी—
क्वार्टर रिपेयरिंग एवं एएमसी कार्य के भुगतान बिलों की सत्यापित प्रतिलिपि
वर्क ऑर्डर, एमबी (Measurement Book) की छायाप्रति
कितने क्वार्टरों में, किस-किस प्रकार का कार्य कराया गया
संबंधित क्वार्टरों में निवासरत कर्मचारियों के नाम
रेत एवं गिट्टी की रॉयल्टी से संबंधित दस्तावेज
“जानकारी बृहद है” कहकर टालमटोल
लोक सूचना अधिकारी (PIO) द्वारा जवाब में कहा गया कि जानकारी “बृहद” है एवं विभिन्न फाइलों में उपलब्ध है, इसलिए आवेदक स्वयं कार्यालय आकर अवलोकन करे। RTI अधिनियम की धारा 7(9) सूचना न देने का आधार नहीं हो सकती । यह धारा केवल सूचना के रूप से संबंधित है, न कि सूचना रोके जाने की अनुमति देती है। यह स्पष्ट रूप से कानून का दुरुपयोग माना जा रहा है।
प्रथम अपील भी रही निष्फल
सूचना न मिलने पर दिनांक 04 मई 2024 को प्रथम अपील दायर की गई, किंतु अपीलीय प्राधिकारी द्वारा—
न तो सूचना उपलब्ध कराई गई,न ही कोई स्पष्ट, लिखित एवं कारणयुक्त आदेश पारित किया गया
इसके बाद भी कई बार स्मरण पत्र दिए गए, लेकिन संबंधित अधिकारी लगातार मामले को टालते रहे।
CIC से प्राप्त सूचना में “भारी गड़बड़ी”, गुमराह करने का आरोप
मामला केंद्रीय सूचना आयोग (CIC), नई दिल्ली तक पहुँचने के बाद जो जानकारी SECL विभाग द्वारा प्रस्तुत की गई, उसे लेकर अत्यंत गंभीर आरोप सामने आए हैं।
आवेदक का कहना है कि—
लगभग 50 सेट में जो दस्तावेज भेजे गए उनमें एक ही पत्र/फोटो कॉपी को बार-बार दोहराया गया वही पत्राचार, जो पहले विभाग द्वारा किया गया था, उसी की कई-कई प्रतियां भेज दी गईं RTI में मांगी गई वास्तविक जानकारी का एक भी दस्तावेज शामिल नहीं किया गया
5 सालों के निर्माण कार्यों पर जांच का होना चाहिए—
आवेदक को जानबूझकर गुमराह करने
केंद्रीय सूचना आयोग को भ्रमित करने
तथा RTI कानून की भावना और उद्देश्य की खुली अवहेलना
माना जा रहा है। धारा 20 के तहत जुर्माने की मांग
लगातार सूचना रोके जाने और भ्रामक दस्तावेज भेजे जाने से आहत होकर आवेदक ने केंद्रीय सूचना आयोग से—
दोषी लोक सूचना अधिकारी एवं संबंधित अधिकारियों
पर RTI अधिनियम की धारा 20 के अंतर्गत दंडात्मक कार्रवाई एवं आर्थिक जुर्माना लगाने की मांग की है।
भ्रष्टाचार की परतें खुलने की आशंका
आवेदक के अनुसार सूचना छुपाने के पीछे—
घटिया एवं अपूर्ण निर्माण कार्य, बिलिंग में गड़बड़ी,
रॉयल्टी चोरी
ठेकेदार अभय शर्मा-अधिकारी गठजोड़
जैसी गंभीर अनियमितताएँ छिपी हो सकती हैं।
उच्च स्तरीय शिकायत की तैयारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायत—
केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC)
SECL मुख्यालय (CMD)
तथा आवश्यकता पड़ने पर मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय
तक ले जाने की तैयारी की जा रही है।
“RTI कानून पारदर्शिता के लिए बना है, लेकिन यहाँ जानबूझकर जानकारी छुपाई जा रही है। एक ही कागज की कई-कई प्रतियां भेजकर आवेदक को और आयोग को गुमराह किया गया। यह सूचना के अधिकार, कानून और संविधान कानून का मज़ाक बना के रखे है जिम्मेदार अधिकारी 2022 से आज तक सभी
स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग
क्वार्टर रिपेयरिंग कार्य,भुगतान बिल,एमबी बुक,रॉयल्टी दस्तावेज की स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज हो गई है।




