ऑनलाइन बांसुरी ऑर्डर बना महंगा सबक, नौरोजाबाद के रिटायर्ड शिक्षक से 2.5 लाख की साइबर ठगी जांच में लगीं पुलिस

 ऑनलाइन बांसुरी ऑर्डर बना महंगा सबक, नौरोजाबाद के रिटायर्ड शिक्षक से 2.5 लाख की साइबर ठगी जांच में लगीं पुलिस 

संदीप तिवारी उमरिया/ नौरोजाबाद (जिला उमरिया)। ऑनलाइन खरीदारी के दौरान जरा-सी लापरवाही एक सेवानिवृत्त शिक्षक को भारी पड़ गई। संगीत के शौक में मंगाई गई बांसुरी ने उन्हें साइबर ठगों के जाल में फंसा दिया और उनके बैंक खाते से ढाई लाख रुपये निकाल लिए गए। घटना के बाद क्षेत्र में साइबर सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। जानकारी के अनुसार, नौरोजाबाद निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक राजाराम चौहान ने चेन्नई की एक कंपनी से चार बांसुरियां ऑनलाइन मंगाई थीं। ऑर्डर के बाद उनके व्हाट्सएप पर रसीद और कूरियर कंपनी DTDC का ट्रैकिंग नंबर भेजा गया। सब कुछ सामान्य प्रतीत हो रहा था। कुछ दिनों बाद पार्सल की स्थिति जानने के लिए उन्होंने ट्रैकिंग लिंक खोला। लिंक पर एक मोबाइल नंबर दिखाई दिया। पार्सल संबंधी जानकारी लेने के लिए उन्होंने उस नंबर पर संपर्क किया। फोन उठाने वाले व्यक्ति ने स्वयं को कूरियर कंपनी का प्रतिनिधि बताया और कहा कि पार्सल में मोबाइल नंबर गलत दर्ज है। उसे अपडेट करने के नाम पर उसने नया नंबर मांगा और भरोसा दिलाया कि समस्या हल कर दी जाएगी।

इसके बाद आरोपी ने कहा कि नंबर अपडेट करने के लिए ऑनलाइन भुगतान करना होगा। उसने एक लिंक भेजा और कुछ अंक दर्ज करने को कहा। फिर बैंक खाता संख्या, एटीएम कार्ड के 16 अंक और कार्ड के पीछे लिखा सीवीवी नंबर भी मांग लिया। भरोसे में आकर शिक्षक ने सारी जानकारी साझा कर दी। कुछ दिन बाद पार्सल पोस्ट ऑफिस पहुंचा और शिक्षक ने उसे प्राप्त भी कर लिया। उन्हें लगा कि सब कुछ ठीक है। लेकिन असली झटका तब लगा जब बैंक से सूचना मिली कि उनके खाते से लगभग ढाई लाख रुपये की निकासी हो चुकी है। तुरंत एटीएम ब्लॉक कराया गया, लेकिन तब तक रकम निकल चुकी थी। परिवार ने तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। मामला थाना नौरोजाबाद और जिला साइबर सेल तक पहुंचा। पुलिस ने संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। थाना प्रभारी ने बताया कि पीड़ित फर्जी ट्रैकिंग लिंक के झांसे में आ गए थे। इसी के जरिए ठगों ने बैंक और कार्ड की गोपनीय जानकारी हासिल कर ली। उन्होंने लोगों से अपील की है कि एटीएम नंबर, सीवीवी, ओटीपी या बैंक खाते की जानकारी किसी भी हालत में साझा न करें। कूरियर कंपनी या बैंक कभी भी फोन पर ऐसी गोपनीय जानकारी नहीं मांगते। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि साइबर अपराधी योजनाबद्ध तरीके से लोगों को निशाना बनाते हैं। डिजिटल सुविधा के साथ सतर्कता भी उतनी ही आवश्यक है।

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