मिलावटी मिठाइयों पर सख्त जांच की मांग त्योहार की खुशियों में न घुले मिलावट का जहर

 मिलावटी मिठाइयों पर सख्त जांच की मांग

त्योहार की खुशियों में न घुले मिलावट का जहर

संदीप तिवारी उमरिया/ नौरोजाबाद। होलिका दहन 3 मार्च को तथा रंगों का पर्व होली 4 मार्च को मनाया जाएगा। त्योहार को देखते हुए नगर में होटलों, मिठाई दुकानों और ठेलों पर बिक रही खोवा, दूध से बनाए जाने वाली दूध मलाई से बनी मिठाइयों तथा भंग युक्त उत्पादों की सघन जांच की मांग उठी है। नागरिकों का कहना है कि पर्व के समय सस्ते दाम में बिकने वाली मिठाइयों और नमकीन में मिलावट की आशंका बढ़ जाती है, जिससे आमजन के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई आवश्यक

खाद्य पदार्थों की शुद्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार राज्य के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की होती है। खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के तहत मिलावटी, अशुद्ध या स्वास्थ्य के लिए हानिकारक खाद्य सामग्री का निर्माण और विक्रय दंडनीय अपराध है। कानून में दोषी पाए जाने पर जुर्माना और कारावास दोनों का प्रावधान है।

नगरवासियों ने की जांच की मांग 

सभी मिठाई दुकानों, डेयरी, होटलों एवं अस्थायी ठेलों से खोवा, दूध और भंग युक्त मिठाइयों के नमूने लेकर जांच की जाए।

*👉बिना पंजीयन संचालित दुकानों पर तत्काल कार्रवाई की जाए।

*👉सस्ते दाम पर बिक रही नमकीन, सलोनी और अन्य खाद्य सामग्री की भी गुणवत्ता जांच हो।

*👉 रंगों में मिलावट या हानिकारक रसायन की रोकथाम हेतु बाजार की निगरानी की जाए।

त्योहार की खुशियों में न घुले मिलावट का जहर

होलिका दहन और होली आपसी प्रेम, सौहार्द और भाईचारे का पर्व है। ऐसे में प्रशासन, नगर परिषद और संबंधित विभागों से अपेक्षा है कि वे विशेष जांच अभियान चलाकर आमजन के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करें।जनस्वास्थ्य सर्वोपरि है। त्योहार की मिठास बनी रहे, इसके लिए मिलावटखोरों पर सख्त कार्रवाई समय पर की जाए यह मांग है और कार्यवाही के नाम पर केवल खाना-पूर्ति न की जाए। हर बार जांच के बाद सैंपल लेकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। आज तक किसी भी दोषी के विरुद्ध ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। यदि हुई भी है तो वह केवल “सेटिंग” तक सीमित रही, जो नियमों के प्रतिकूल है।लगातार इस मामले में यह सूचना मिलती रही है कि जांच में कमियां पाई गईं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने न तो स्पष्ट रूप से कानून के तहत कार्रवाई की और न ही दोषियों पर कड़ी कार्यवाही सुनिश्चित की। आखिर कार्रवाई क्यों नहीं हुई, यह स्वयं चर्चा का विषय बना हुआ है। इसी लापरवाही का परिणाम है कि आज भी बाजारों में मिलावटी खोवा और मिठाइयां त्योहारों के साथ-साथ आम दिनों में भी खुलेआम बिक रही हैं। आम जनता यह नहीं जान सकती कि इनमें क्या कमी या मिलावट है, लेकिन यह सुनिश्चित करना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है, जिसे सरकार ने खाद्य सुरक्षा के लिए अधिकृत किया है। दुर्भाग्य से विभाग अपने दायित्व से पल्ला झाड़ता हुआ नजर आ रहा है। यदि समय रहते जिम्मेदार अधिकारी इस ओर गंभीर ध्यान नहीं देंगे तो यह आम नागरिकों के जीवन और स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ होगा। अतः जिला मुख्यालय सहित पाली, मानपुर, करकेली, विंध्य कालोनी एवं नौरोजाबाद क्षेत्रों में व्यापक जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी एवं पारदर्शी कार्रवाई की जाए।


 

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