बांधवगढ़ में गौर पुनर्स्थापना अभियान का दूसरा चरण सफलतापूर्वक प्रारंभ
जनसूत्र संदीप तिवारी/ उमरिया बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में गौर पुनर्स्थापना अभियान के दूसरे चरण की सफल शुरुआत हो गई है। इस चरण के अंतर्गत सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से लाए जा रहे कुल पचास गौरों में से पहले दिन 23 जनवरी को प्रातः 9.30 बजे से 10 बजे के बीच पांच गौरों को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के कलवाह परिक्षेत्र में निर्मित विशेष बाड़े में सुरक्षित रूप से छोड़ा गया। इन पांच गौरों में एक नर एवं चार मादा सम्मिलित हैं।
इस अवसर पर क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय तथा उपसंचालक श्री योहान कटारा की उपस्थिति में पूरी प्रक्रिया संपन्न कराई गई। यह गौर सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के चूरना क्षेत्र के समीप स्थित वन क्षेत्र से चयनित कर सुरक्षित रूप से पकड़े गए थे। इस कार्यवाही का संचालन सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की क्षेत्र संचालक सुश्री राखी नंदा तथा भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. पराग निगम के मार्गदर्शन में किया गया। गौरों की संख्या में संतुलन बनाए रखने तथा उनके वंशानुगत गुणों में विविधता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह पुनर्स्थापना अभियान भारतीय वन्यजीव संस्थान और मध्यप्रदेश वन विभाग के संयुक्त सहयोग से संचालित किया जा रहा है।
इस परियोजना के अंतर्गत पहले चरण में फरवरी 2025 के दौरान बाइस गौरों को बांधवगढ़ क्षेत्र में सफलतापूर्वक पुनर्स्थापित किया जा चुका है। वर्तमान में संचालित दूसरा चरण 22 जनवरी से 25 जनवरी 2026 तक जारी रहेगा, जिसके दौरान कुल सत्ताईस गौरों को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व लाया जाना प्रस्तावित है। इस कार्य के लिए नौ विशेष परिवहन दल गठित किए गए हैं। प्रत्येक दल में एक उप वनमंडल अधिकारी अथवा वन क्षेत्रपाल, दो वन्यप्राणी चिकित्सक, वनपाल, वनरक्षक सहित कुल दस कर्मचारी तैनात किए गए हैं तथा गौरों के सुरक्षित परिवहन के लिए चार वाहनों की व्यवस्था की गई है। यह उल्लेखनीय है कि बांधवगढ़ क्षेत्र से गौर प्रजाति 1990 के दशक में पूर्णतः लुप्त हो गई थी। इसके पश्चात वर्ष 2010-11 में कान्हा टाइगर रिजर्व से पचास गौरों को यहां लाकर पुनर्स्थापना की प्रक्रिया प्रारंभ की गई, जो अत्यंत सफल रही। वर्तमान समय में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में गौरों की संख्या एक सौ इक्यानवे से अधिक हो चुकी है। यह संपूर्ण अभियान न केवल गौरों की आबादी को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि जैव विविधता संरक्षण और प्राकृतिक पारिस्थितिकी संतुलन को बनाए रखने की दिशा में भी एक उल्लेखनीय उपलब्धि माना जा रहा है।


