“नौरोजाबाद पोस्ट ऑफिस बना मनमानी का अड्डा” नियम-कानून ठेंगा पर, जनता परेशान — जिम्मेदार कौन?

 पैसे निकालने में आमजन को भारी दिक्कत, सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल

संदीप तिवारी/उमरिया (मध्य प्रदेश)
जिले के नौरोजाबाद स्थित उप डाकघर में इन दिनों भारी अव्यवस्था, लापरवाही और मनमानी का माहौल बना हुआ है। यहां कार्यरत जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की उदासीनता के कारण आम नागरिकों को अपने ही जमा पैसों के लिए घंटों भटकना पड़ रहा है। लगातार शिकायतों के बावजूद व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हो रहा, जिससे जनता में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पोस्ट ऑफिस में नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। जमा-निकासी जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में पारदर्शिता का अभाव है। पासबुक में समय पर एंट्री नहीं की जाती, जिससे खाताधारकों को अपने लेन-देन की सही जानकारी नहीं मिल पाती। यह स्थिति सीधे तौर पर भारतीय डाक विभाग के निर्धारित वित्तीय नियमों और सेवा मानकों का उल्लंघन मानी जा रही है।

सबसे गंभीर आरोप यह है कि कई बार अधिकृत कर्मचारी के स्थान पर अन्य लोग—यहां तक कि डाक वितरण करने वाले कर्मचारी—ही पैसा जमा करते नजर आते हैं, जबकि नियमानुसार यह कार्य केवल अधिकृत काउंटर कर्मचारी द्वारा ही किया जाना चाहिए। इससे पूरे लेन-देन की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लग गया है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि जिम्मेदार अधिकारी अक्सर काउंटर से नदारद रहते हैं। पोस्ट ऑफिस के पास ही निवास होने के कारण वे बीच-बीच में चले जाते हैं और कार्य अन्य कर्मचारियों के भरोसे छोड़ दिया जाता है। इस दौरान कई साहब मोबाइल फोन में व्यस्त रहते हैं, जबकि आम लोग भीषण गर्मी में घंटों लाइन में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते रहते हैं। नेटवर्क समस्या का हवाला देकर भी कई बार लेन-देन टाल दिया जाता है। वहीं, रजिस्ट्री और अन्य डाक सेवाओं के लिए भी लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। आरोप है कि कई बार दोपहर 1 या 2 बजे से पहले ही काउंटर बंद कर दिया जाता है और “साहब चले गए” कहकर लोगों को लौटा दिया जाता है। पोस्ट ऑफिस में CCTV कैमरों की अनुपस्थिति भी एक बड़ी खामी बनकर सामने आई है। निगरानी व्यवस्था न होने से कर्मचारियों की जवाबदेही तय नहीं हो पा रही, जिससे लापरवाही और अनियमितता को बढ़ावा मिल रहा है।


महिलाओं और बच्चों से जुड़ी योजनाएं, जैसे सुकन्या समृद्धि योजना, भी इस अव्यवस्था की चपेट में हैं। लोगों का आरोप है कि पैसा जमा होने के बावजूद पासबुक में एंट्री नहीं की जाती और हर बार “अगली बार हो जाएगा” कहकर टाल दिया जाता है। इससे योजना की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ रहा है।
इसके अलावा, पोस्ट ऑफिस में मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है। भीषण गर्मी में दूर-दराज से आने वाले लोगों के लिए पीने के पानी तक की कोई व्यवस्था नहीं है, जो मानवता और प्रशासनिक संवेदनशीलता दोनों पर सवाल खड़े करता है।


 जर्जर भवन बना मुसीबत
नौरोजाबाद पोस्ट ऑफिस का भवन भी काफी पुराना और जर्जर हो चुका है। दीवारें कमजोर, व्यवस्था अस्त-व्यवस्थित और सुविधाएं नगण्य हैं। ऐसे माहौल में न केवल कर्मचारी बल्कि आम नागरिक भी असुरक्षित महसूस करते हैं।

जनता की मांग
नागरिकों ने प्रशासन और भारतीय डाक विभाग के उच्च अधिकारियों से निम्न मांगें की हैं पोस्ट ऑफिस की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई हो, सभी लेन-देन कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए, पोस्ट ऑफिस में CCTV कैमरे अनिवार्य रूप से लगाए जाएं, आम जनता के लिए पीने के पानी और बैठने की व्यवस्था की जाए, जर्जर भवन को हटाकर नया आधुनिक पोस्ट ऑफिस भवन बनाया जाए या तत्काल सुधार कार्य कराया जाए, कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति और समयबद्ध सेवा सुनिश्चित की जाए

 अब नजरें अधिकारियों पर
यह मामला अब नौरोजाबाद से निकलकर पूरे शहडोल संभाग में चर्चा का विषय बन चुका है। लगातार बढ़ती शिकायतों के बीच अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भारतीय डाक विभाग के वरिष्ठ अधिकारी इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाते हैं।
अगर समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो आम जनता को मजबूर अपना खाता बंद करना पड़ सकता है।

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